साल 2025 में दुबई चॉकलेट, लबुबु डॉल्स और ‘6-7’ स्लैंग ने खूब धूम मचाई। लेकिन अब वक्त आ गया है इन वायरल ट्रेंड्स को पीछे छोड़ने का। जानें क्यों ये ट्रेंड्स अब बोरिंग हो चुके हैं।
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जैसे-जैसे हम 2025 को अलविदा कह रहे हैं और नए साल की दहलीज पर खड़े हैं, यह वक्त है पीछे मुड़कर उन चीजों को देखने का जिन्होंने इस साल हमारे दिमाग और सोशल मीडिया पर कब्जा जमाए रखा। हमारे बैग पर लटकते ‘लबुबु’ (Labubus), पेट में भरी हुई ‘दुबई चॉकलेट’ और कानों में गूंजता ‘6-7’ का शोर।
साल 2025 में इन ट्रेंड्स ने अपनी 15 मिनट की शोहरत तो खूब बटोरी लेकिन सच कहें तो अब हम इनसे पक चुके हैं। ये चीजें अब पुरानी हो चुकी हैं और समझदारी इसी में है कि इन्हें नए साल यानी 2026 में अपने साथ न ले जाएं। इस आर्टिकल में हम उन वायरल चीजों का विश्लेषण करेंगे जिन्हें अब हमेशा के लिए ‘स्कैट’ यानी दफा हो जाना चाहिए।
‘6-7’ का शोर और इसका अजीबोगरीब मतलब
सदियों से युवा अपनी अलग भाषा या स्लैंग बनाते आए हैं। जेन अल्फा (Gen Alpha) और उनके जूनियर्स के लिए यह साल ‘स्किबिडी’ (skibidi), ‘रिज’ (rizz) और सबसे ज्यादा ‘6-7’ के नाम रहा। यह सिर्फ एक नंबर नहीं था बल्कि इसके साथ हाथ को ऊपर करके एक अजीब सा इशारा भी किया जाता था। इसका मुख्य काम शिक्षकों और माता-पिता को परेशान करना था और इसमें वे सफल भी रहे।
कई माता-पिता भी खुद को कूल दिखाने के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे लेकिन सच तो यह है कि यह बड़ों पर बिल्कुल नहीं जंचता। इसकी शुरुआत रैपर स्क्रिला के गाने और बास्केटबॉल खिलाड़ी ला मेलो बॉल की हाइट से मानी जाती है। टिकटॉक पर यह इतना वायरल हुआ कि Dictionary.com ने इन दो नंबरों को अपना ‘वर्ड ऑफ द ईयर’ बना दिया। मजे की बात यह है कि इसका वास्तव में कोई मतलब नहीं है। इसका मकसद सिर्फ रैंडम होना और लोगों को कंफ्यूज करना था। अब मिशन पूरा हो चुका है इसलिए ‘6-7’ को अलविदा कहने का वक्त आ गया है।
दुबई चॉकलेट और लबुबु का क्रेज
साल 2025 में खाने-पीने की चीजों में अगर किसी चीज ने राज किया तो वह थी ‘दुबई चॉकलेट’। हर इंस्टाग्राम रील और यूटयूब वीडियो में लोग इस महंगी और पिस्ता से भरी चॉकलेट को तोड़ते और खाते हुए नजर आए। यह ट्रेंड इतना ज्यादा फैल गया कि अब इसे देखकर ही पेट भरने लगा है।
वहीं फैशन एक्सेसरीज के नाम पर ‘लबुबु’ (Labubu) ने सबको दीवाना बना दिया। यह छोटे खिलौने या कीचेन हर किसी के बैग पर लटकते हुए नजर आए। यह एक स्टेटस सिंबल बन गया था। लेकिन किसी भी ट्रेंड की तरह इनकी भी एक उम्र होती है। अब वक्त है कि हम अपनी अलमारियों और डाइट से इन चीजों को थोड़ा ब्रेक दें और कुछ नया तलाशें।
पॉजिटिव वाइब्स ओनली? नहीं, अब बस करें
साल 2025 में एक और चीज जो बहुत हावी रही वह थी ‘टॉक्सिक पॉजिटिविटी’ यानी हर हाल में सकारात्मक रहने का दबाव। सोशल मीडिया पर “गुड वाइब्स ओनली” (Good vibes only) और “इतना नेगेटिव मत बनो” जैसे जुमले तीरों की तरह चलाए गए। यह सुनने में अच्छा लगता है लेकिन असल जिंदगी में यह खतरनाक है।
इंसानी भावनाएं ऐसे काम नहीं करतीं। दुख, गुस्सा और निराशा भी जीवन का हिस्सा हैं। जब हम लोगों से कहते हैं कि “सब ठीक हो जाएगा” या “सिर्फ अच्छा सोचो” तो हम उनकी असली भावनाओं का गला घोंट रहे होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भावनाओं को दबाना (Suppression) एक तरह का अत्याचार है। आशावादी होना अच्छी बात है लेकिन 2026 में हमें अपनी और दूसरों की भावनाओं को खुलकर स्वीकार करना चाहिए चाहे वे अच्छी हों या बुरी।
निष्कर्ष
साल 2025 यादों के लिहाज से शानदार रहा लेकिन इसके कुछ ट्रेंड्स अब अपनी अंतिम सांसें ले रहे हैं। ‘6-7’ का बेमतलब शोर हो या जबरदस्ती की पॉजिटिविटी, इन चीजों को पुराने साल में ही छोड़ देना बेहतर है। नए साल में हम उम्मीद करते हैं कि कुछ ऐसे ट्रेंड्स आएंगे जो न केवल मनोरंजक होंगे बल्कि थोड़े ज्यादा अर्थपूर्ण भी होंगे। तब तक के लिए इन वायरल ट्रेंड्स को कहिए- टाटा, बाय-बाय।
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