उत्तर प्रदेश में 1 जनवरी से वाहन प्रदूषण जांच (PUCC) महंगी हो रही है। पेट्रोल और सीएनजी वाहनों के लिए फीस बढ़ी है जबकि डीजल को राहत मिली है। बिना सर्टिफिकेट 10,000 रुपये जुर्माने का नियम भी जानें।
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नए साल का जश्न मनाने से पहले उत्तर प्रदेश के वाहन मालिकों के लिए एक जरूरी और थोड़ी चिंताजनक खबर है। परिवहन विभाग ने प्रदेश में प्रदूषण जांच शुल्क यानी पीयूसी चार्जेस में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है जो 1 जनवरी से लागू हो जाएगा। हालांकि इस फैसले में डीजल गाड़ी चलाने वालों को थोड़ी राहत दी गई है लेकिन पेट्रोल और सीएनजी वाहन मालिकों को अब अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी।
इसके साथ ही सरकार ने प्रदूषण मानकों को लेकर सख्ती भी बढ़ा दी है। अगर आप बिना वैध प्रदूषण सर्टिफिकेट के सड़क पर गाड़ी चलाते हुए पकड़े गए तो आपको भारी भरकम जुर्माना भरना पड़ सकता है। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि नई दरें क्या हैं और आप कैसे एक्स्ट्रा चार्ज और जुर्माने से बच सकते हैं।
1 जनवरी से किन गाड़ियों के लिए कितना महंगा होगा प्रदूषण जांच
परिवहन विभाग के नए आदेश के मुताबिक डीजल वाहनों को छोड़कर बाकी सभी श्रेणियों के वाहनों की प्रदूषण जांच फीस में 5 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। 1 जनवरी से पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों यानी बाइक और स्कूटर की जांच के लिए अब 65 रुपये की जगह 70 रुपये चुकाने होंगे। वहीं पेट्रोल एलपीजी और सीएनजी से चलने वाले तिपहिया वाहनों का शुल्क 85 रुपये से बढ़ाकर 90 रुपये कर दिया गया है।
चारपहिया वाहनों यानी कार और जीप के मामले में भी यही नियम लागू होगा। पेट्रोल सीएनजी या एलपीजी कार की जांच के लिए अब 90 रुपये फीस देनी होगी। अच्छी खबर यह है कि डीजल वाहनों के शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वह पहले की तरह 120 रुपये ही रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि डीजल गाड़ियों के रेट पिछले साल ही 10 रुपये बढ़ाए गए थे इसलिए इस बार उन्हें राहत दी गई है।
10 हजार का जुर्माना और सख्त नियमों का डर
सिर्फ फीस बढ़ना ही चिंता की बात नहीं है बल्कि प्रशासन की सख्ती ज्यादा बड़ा मुद्दा है। प्रदेश में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अगर चेकिंग के दौरान आपके वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र एक्सपायर या अवैध पाया जाता है तो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आप पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
नियमों के मुताबिक चाहे आपकी गाड़ी दोपहिया हो या चारपहिया उसे हर 6 महीने में प्रदूषण जांच केंद्र ले जाकर सर्टिफिकेट रिन्यू कराना अनिवार्य है। यह नियम पेट्रोल डीजल सीएनजी और एलपीजी सभी तरह के वाहनों पर समान रूप से लागू होता है। इसलिए सलाह दी जाती है कि समय रहते अपनी गाड़ी की जांच करवा लें।
वाहन मालिकों को दी गई सलाह: 31 दिसंबर से पहले निपटा लें काम
परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों को एक स्मार्ट सलाह दी है। जिन लोगों की गाड़ियों के प्रदूषण सर्टिफिकेट की वैधता अगले कुछ दिनों में खत्म होने वाली है वे 1 जनवरी का इंतजार न करें। अगर आप 31 दिसंबर तक जांच करवा लेते हैं तो आपको पुरानी दरों पर ही सर्टिफिकेट मिल जाएगा और आप बढ़े हुए 5 रुपये देने से बच जाएंगे।
अपर परिवहन आयुक्त (राजस्व) डॉ आर के विश्वकर्मा ने बताया कि नई दरों को अपडेट करने के लिए एनआईसी (NIC) को निर्देश भेज दिए गए हैं। 1 जनवरी की सुबह से ऑनलाइन पोर्टल पर नई दरें अपने आप लागू हो जाएंगी और जांच केंद्र पुराने रेट पर रसीद नहीं काट पाएंगे। फिलहाल प्रदेश में 225 से ज्यादा केंद्र हैं जहां यह सुविधा उपलब्ध है।
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए क्या है खुशखबरी
जहां पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के लिए नियम सख्त हो रहे हैं वहीं इलेक्ट्रिक वाहन (EV) मालिकों के लिए अच्छी खबर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रदूषण जांच से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। यानी ईवी मालिकों को न तो कोई जांच करानी है और न ही कोई फीस देनी है। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि लोग प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को छोड़कर क्लीन एनर्जी वाली इलेक्ट्रिक गाडियों की तरफ शिफ्ट हों।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर 1 जनवरी से लागू होने वाला यह बदलाव आपकी जेब पर थोड़ा असर जरूर डालेगा लेकिन 10 हजार के जुर्माने से बचने के लिए 5 रुपये की बढ़ोतरी कोई बड़ी बात नहीं है। समझदारी इसी में है कि आप अपने वाहन के कागजात हमेशा पूरे रखें। अगर आपकी ड्यू डेट पास है तो आज ही नजदीकी केंद्र जाकर सर्टिफिकेट बनवा लें।
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